मैं क्या करूँ बताओ भैया
राज रोग ने भौंका भाला
तन मन सब जर्जर कर डाला
तन्त्र मन्त्र हो गए नपुंसक
रोग हो गया क्रूर अहिंसक
नहीं जेब में बचा रुपैया
दिया उधार सभी ने पहले
भारी व्याज मूल के बदले...
Written by प्रो० डा. जयजयराम आनंद
on कविता में आनंद
5 days 4 hours ago