बेतरतीब से दिन ,चिंदी चिंदी हो चुकी रातों के बीच
कोई वक़्त तो होगा?
जब तुम हमारे साथ होते होगे
रगड़ रहे होगे अपनी मुट्ठियों में मेरी अँगुलियों को
कुछ लिखा मिटाने को ,कुछ अलिखा बनाने को
बंद कर ली...
अम्मा गा रही हैं - "छापक पेड़ छिउलिया कि पतवन गहवर हो..." । मन टहल रहा है अम्मा की स्वर-छाँह में । अनेकों बार अम्मा को गाते सुना है, कई बार अटका हूँ, भटका हूँ स्वर-वीथियों में । कितनों को संगी बना...
Written by हिमांशु । Himanshu
on सच्चा शरणम्
52 minutes ago
पंद्रह दिनों पहले अमृता एक बार फिर इमरोज़ के सपनों में आई, बादामी रंग का समीज सलवार पहने |'सुनते हो ,कमरे में इतनी पेंटिंग क्यूँ इकठ्ठा कर रखी है ?अच्छा नहीं लग रहा ,कुछ कम कर दो "|अमृता कहें...
आज से कई बरस पहले जब यतींद्र मिश्र ने एक बहुत अच्छी और खुली पत्रिका सहित शुरू की थी तब उसके दूसरे या तीसरे अंक में (शायद अक्टूबर 2001 में) यह पाठ पहली बार प्रकाशित हुआ था। अनुनाद पर कुछ समय पहले...
Written by शिरीष कुमार मौर्य
on अनुनाद
2 days 10 hours ago
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... लेंठड़ा सनातन पात्र से बाहर आ चलते चलते थक गया था। सुस्ताने के लिए वह जहाँ छाये में रुका, वह जगह पुस्तकालय भवन कहलाती थी। भवन का द्वार......
नमस्कार जी …सत श्री अकाल ..आप सब महानुभावो को …और कैसे है आप ठीक ही होगे नही तो चर्चा पढने कैसे आते :)
कुछ दिन पहले ब्लागर मीत मीट आयोजित किया गया था और उसी समय राजकुमार ग्वालानी जी ने कुछ नया...
क्या अनशनो पर राजनीति करना ठीक है अभी 11 दिनो के अनशन पर भारत सरकार आन्ध्र सरकार तथा सम्पूर्ण विप्क्ष इस अनशन को समाप्त करने तथा एक अलग राज्य बनाने पर एकमत दिखाई दिये आड्वाणी जी की...
पिछले दिनों ऑफिस के काम से एक यात्रा पर जाना हुआ. दिल्ली, कानपुर और बीच में लखनऊ. यूँ तो बहुत दिन नहीं हुए पर पता नहीं क्यों लगा कि एक अरसे बाद आना हुआ है इन गलियों में. थोड़ी भाग-दौड़ वाली यात्रा...
Written by अभिषेक ओझा
on ओझा-उवाच
1 day 1 hour ago