बड़ी मुद्दत के बाद आज तन्हा हूँ,
मैं रोता हूँ, तो रो लेने दो !!
आंसू न पोछो, मुझे धीर न दो
मैं रोता हूँ, तो रो लेने दो !!
अपनों को परखने की,
मुझको न थी आदत ही कभी,
वो छलतें है मुझको, तो छल...
Written by Sudhir (सुधीर)
on जीवन के पदचिन्ह
1 day 7 hours ago