धन-धन भाग हमारे
आचार्य संजीव 'सलिल'
धन-धन भाग हमारे, प्रभु द्वारे पधारे।
शरणागत को तारें, प्रभु द्वारे पधारे....
माटी तन, चंचल अंतर्मन, परस हो प्रभु, करदो कंचन।
जनगण नित्य पुकारे, प्रभु...
Written by आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'
on कायस्थ परिवार पत्रिका
2 days ago