रहस्य की तमाम पर्तों के बीच दबा हुआ एक गुमनाम सा अपराधी संगठन. सैकड़ों वर्षों से आमजन की जानकारी से सर्वथा परे रहकर गुप्त रूप से अपनी गतिविधियों को संचालित करता हुआ. ली फ़ॉक ने अपनी कई कहानियों को इस...
कथाक्रम-आयोजन का प्रारंभ करते हुए शैलेन्द्र सागर ने अपनी मां को याद किया जिन्होंने पिछले दिनों दुनिया को अलविदा कह दिया था। शैलेन्द्र सागर ने अपनी मां पर बेहद मार्मिक संपादकीय ‘कथाक्रम’ के
सितंबर...
हिंदी के वरिष्ठ पत्रकार एवं कवि रामकृष्ण पांडेय के असामयिक निधन पर आज पटना की प्रलेस इकाई ने केदार भवन स्थित अपने कर्यालय में एक शोक-सभा आयोजित की. पिछले सोमवार की रात दिल का दौरा पड़ने से उनका...
Written by योगेंद्र कृष्णा Yogendra Krishna
on शब्दसृजन
9 days 15 hours ago
सबद मे प्रकाशित इस आलेख पर यह टिप्पणी पोस्ट करना चाह्ता था पर तकनीकी खामियो के चलते बार बार यही संदेश मिलता रहा -
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Written by vijay gaur/विजय गौड़
on लिखो यहां वहां
1 day 6 hours ago
WBUT Exam Timetable 2009 at www.wbut.net
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WBUT Results 2009 at www.wbut.net
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हाय क्या थे वो दिन फ़ाका-मस्ती के !!
जब एक कट-चाय समोसे से,
हम यह दुनिया नापा करते थे,
एक ख्याली धागे के दम पर,
हम हर सिस्टम बांधा करते थे
यूँ तो हर बात फलसफे पर होती थी
एक हम ही...
Written by Sudhir (सुधीर)
on जीवन के पदचिन्ह
6 days 13 hours ago
S Sreesanth apparent his acknowledgment to all-embracing candid with a adverse affectation of bond bowling to put India on the threshhold of a arresting achievement in the additional Test adjoin a...
Written by Palan (Man Of Fire)
on Nature of Heaven
4 days 4 hours ago
Nowadays in Cyber World privacy is a big problem for everybody. The public is demanding certain things while entering cyber world main is privacy and other is like prevention of data theft,Virus...
ब्लॉग्गिंग की उलझनों पर
बहुत बड़े -बड़े ज्ञानी कह
गए सो हमारी क्या बिसात?
फिर भी मन में था जो वह
ठेल ही दिए.....शायद यह
अपनी ब्लॉग्गिंग यात्रा का
अगला पड़ाव ही हो ?
कु
छ कुछ...
Written by प्रवीण त्रिवेदी ╬ PRAVEEN TRIVEDI
on प्राइमरी का मास्टर
4 days 5 hours ago
( यह कविता गुजराती की मशहूर कवियत्री और सामाजिक कार्यकर्ता सरूप बेन की है। इसे गुजराती से हिन्दी में अनुदित मैंने किया है...बाकी तो बात ही बोले तो बेहतर )
क्या है वज़ह मेरे जीने की
नहीं
मै क़लमा...
Written by अशोक कुमार पाण्डेय
on असुविधा
1 day 14 hours ago