सूपा मन चुप बइठे हे अऊ,
चलनी बिक्कट बोलत हे ।
कोइली ताकत बइठे हे,
अऊ कागा आम खखोलत हे ।।
छाती के तै दूध पियाए ,
लइका के बड़ साद रहिस ,
उही दूध ला पीके बेटा,
छाती ला अब छोलत हे ।
सूपा मन ..............
Written by सुभाष गजेन्द्र
on गांव की गलीयों से.....
1 day 15 hours ago