कई दिन पहले फ़ोन पर अपने आने की संभावना व्यक्त की थी। चार जुलाई की रात अचानक फ़ोन मिला-हाँ, प्रेम जी, हम लोग आ गए हैं। रात देरी से आए हैं। आते ही शादी के कार्यक्रमों में लग जाना है। जैसी स्थिति होगी...
Written by डा. फीरोज़ अहमद
on वाङ्मय हिन्दी पत्रिका ( vangmay-patrika)
9 days 15 hours ago