मेरे जीने के लिये एक आसरा दर्करर था,
दुनिया गम देती गयी मेरी गुज़र होती गयी ।
जल्वे मचल गये तो सेहर का गुमा हुआ ,
ज़ुल्फे बिखर गयी तो सैअह रात हो गयी ।
हमें आपनो के सितम याद आये,
जब भी गरोन की इनायत...
Written by gargiji2008@gmail.com (Gargi Gupta)
on अभिव्यक्ति
5 hours 33 mins ago