वो बुलायें तो क्या तमाशा हो
हम न जायें तो क्या तमाशा हो
ये किनारों से खेलने वाले
डूब जायें तो क्या तमाशा हो
बन्दापरवर जो हम पे गुज़री है
हम बतायें तो क्या तमाशा हो
आज हम भी तेरी वफ़ाओं
...
Rashtriya Pustak Mela Samiti organizes Book fairs at different locations all over the country. The Samiti organizes its book fair at Nagpur almost yearly in December-January timeframe. As per...
मेरे लिए ये वक्त सबसे अफसोसजनक है। पिछले कुछ महीनों में मैंने जो जाना वो निस्संदेह वेदनायुक्त है। मैने दुनिया को हमेशा खूबसूरत अंदाज़ में देखा। हमेशा ये सोचा कि चलो बुरा हो रहा है तो कुछ अच्छा भी...
Written by archana rajhans
on मेरा कोना
4 days 21 hours ago
बा वाल्मिकी,
रामराज्याची स्तुती तू गावी
कारण तू कवींचा महाकवी!
क्रौंच पक्ष्याची हत्या पाहून
तुझे कारुणिक मन आक्रंदून उठले
तुझा जन्म झाला गावाबाहेर
उपेक्षित वस्तीत... जिथे दुःखच जन्मले
तिथले...
Written by Ganesh Dhamodkar
on Marathi Poetry
8 days 23 hours ago
हमारा सलाम
- श्री मनमोहन करकेरा
राजीव तुम्हारे नमन* को हमारा सलाम
सरस्वत रचना को शत शत प्रणाम।
शायद हम तुम्हें खो गए उस 26/11 की दर्दनाक रात
लेकिन तुम फिर प्रकट हो गए नमन के साथ।
तुम्हारा मधुर...
भारत राष्ट्र के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद ने कहा था, "सच्ची स्वतंत्रता के लिए अपनी जरूरतों को कम करना चाहिए।" उन्होंने अपने जीवन में जरूरतों को इतना कम कर लिया कि उनके बारे में यह आम...
Written by ज्ञानेश उपाध्याय (gyanesh upadhyay)
on ज्ञानघर
8 days 14 hours ago
पलामू (डाल्टनगंज ) के साहित्यकार-पत्रकार श्री मनोज ज्वाला के उपन्यास " महात्मा की बेटी और सियासत " का लोकार्पण १३ दिसंबर २००९ को हिन्दी भवन , विष्णु दिगंबर मार्ग (निकट आई .टी.ओ.),नई दिल्ली में प्रातः...
वो बुलायें तो क्या तमाशा हो
हम न जायें तो क्या तमाशा हो
ये किनारों से खेलने वाले
डूब जायें तो क्या तमाशा हो
बन्दापरवर जो हम पे गुज़री है
हम बतायें तो क्या तमाशा हो
आज हम भी तेरी वफ़ाओं
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मोबाइल पर बात करना तो मेरा फेवरिट शौक है. इसलिए मम्मी मेरे लिए एक टॉय मोबाइल ले आयी हैं. ये हार्मफुल भी नहीं होता
जब भी मोबाइल पर किसी की कॉल आती है, मेरा ध्यान सबसे पहले जाता है. और मुझे तो...
Written by लविज़ा | Laviza
on लविज़ा | Laviza
7 days 18 hours ago