जब से समझ में आये इसरार बे-ख़ुदी के,
उठाने लगे है पर्दे दिल से ख़ुद आगाही के|
जिस का सुरूर हस्ती जिसका ख़ुमार मस्ती,
ऐ दिल नवाज़ साक़ी दे दो-चार घूँट उसी के|
हर संगेदर का बोसा हर आस्ताँ पे सिजदा,...
Written by Shakeel Parwez
on अदब
3 days 19 hours ago