दुझते रिसते झख्मोंका वह बाकी निशां
दिल की तहोंमें दफ़न करके बैठ जाएँ ,
आज तेरी यादोंके आगोशमें लिपटकर
बस नूरके इक बूंद को हलकसे निगल जाएँ .....
वफ़ाकी जो रस्म थी बदस्तूर हम निभाए है ,
बस मिलनके...
Written by प्रीति टेलर
on जिंदगी : जियो हर पल
19 hours 41 mins ago